शनिवार, 14 अगस्त 2010

लेकिन राहुल,तुम करोगे आखिर क्या....???

लेकिन राहुल,तुम करोगे आखिर क्या....??

प्रिय राहुल, अभी-अभी अखबार में यह खबर पढी कि तुम प्रधानमंत्री बनने के लिए देश के लोगों की सर्वोच्च पसंद हो,कोई उनतीस फ़ीसदी लोगों की पसंद और यह भी कि तुमने इस पद के अन्य दावेदारों यथा सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह को पीछे छोड दिया है....किसी और दल के किसी व्यक्ति का तो अब इस पद को पाने का कोई उपाय ही नहीं,क्योंकि तुम्हारी वर्तमान लोकप्रियता के सम्मुख कोई कहीं नहीं ठहरता,तो यह प्रश्न स्वयं ही पैदा हो जाता है कि आखिर प्रधानमंत्री बनकर आखिर तुम करोगे तो करोगे क्या,तुम्हारी सोच क्या है,तुम्हारी देशना क्या है,तुममें देश के प्रति जज्बा क्या है और इसकी समस्याओं की जानकारी कितनी है,आखिर इन्हीं सवालों के उत्तर में तुम्हारे खुद के प्रधानमंत्री होने के औचित्य से अधिक देश को उसकी प्राथमिकताओं के आधार पर उसकी समस्याओं को हल में निहित है इस पद का औचित्य...!!पुन:,यह भी तय है कि इस देश की भोली-अनपढ और भावुक जनता आने वाले दिनों में तुम्हें इस "राजगद्दी" का वास्तविक हकदार समझते हुए इसे तुम्हें(प्रकारांतर से तुम्हारी मम्मी को)सौंप भी दे,जैसा कि वह विगत में करती भी आयी है तो तुम वही करने वाले हो जैसा कि विगत की सारी सरकारें करती हुई आयी हैं अथवा सचमुच तुम्हारे दिल में इस देश का कोई अदभुत भविष्य हिलोरे ले रहा है,जिसे कि साकार करने हेतु राजनीति के इस मैदान में,इस घमासान में कूद पडे हो...??यह हम नहीं जानते और सच तो यह है कि किसी के बारे में कुच नहीं जानते....और किसी को भी महज उसके भाषणों के आधार पर वोट दे डालते हैं,बिना उसकी कोई पड्ताल किये...और देश को स्वाधीनता दिलाने वाली इस कांग्रेस को तो हम खुद ही देश की बपौती मानते हैं,बिना यह जाने कि इसी कांग्रेस ने आज़ादी के बाद देश के कुछ किया भी है या इसकी जडों में सिर्फ़ मठ्ठा ही डाला है, मगर उसके बावजूद भी ओ राहुल मैं जानता हूं कि देश के अगले प्रधानमंत्री तुम्ही हो,क्योंकि मैं इस देश की जनता को जानता हूं तथा साथ ही साथ तुम्हारी कांग्रेस की सारी नौटंकियों को भी जानता और परखता हुं !!
अब देखो ना,मेरे(मतलब देश की समुची सोयी हुई जनता के) प्रश्न के उत्तर में यह भी तय है कि तुम बजाय उत्तर देने के उल्टे हमीं से प्रश्न करने लगो कि किसी युवराज या राजकुमार से ऐसे भद्दे सवाल पूछ्ने वाले हम होते कौन हैं,या फिर यह भी कि ऐसे सवाल हमने विगत में किसी से क्युं नहीं पूछे,किसी भी नेता से उसकी देशभक्ति का प्रमाण क्यूं नहीं मांगा.....कभी-कभी गलत समय पर सवाल पूछे जाने पर सवाल अनपेक्षित रूप से भडकाऊ हो जाता है,है ना राहुल...??मगर प्यारे राहुल,सवाल तो किसी भी वक्त उठाया जा सकता है,है कि नहीं...!!और उठाये गये सवाल के जवाब किसी जनप्रतिनिधि से ही क्यूं,किसी संभावित जनप्रतिनिधि से भी उतने ही अपेक्षित होते हैं,होते हैं ना राहुल..??अलबत्ता तो राहुल इस देश में सवाल ही बहुत कम पूछे गये हैं किसी से मगर उससे भी बडा दुर्भाग्य तो यह कि किसी के द्वारा किसी भी सवाल का कोई यथोचित जवाब ना दिये जाने के कारण यह देश,जिसे श्रद्दा से कभी हमने अपना वतन कह डाला है(उफ़ कह डाला था कहना था..!!),प्रश्नों के ऐसे अनसुलझे चौराहों से जा फंसा है,जिसे संभवत: कोई युवा ही सुलझा सकता है,सूझ-शक्ति-दूरदर्शिता-आत्मबल-स्वाभिमान-गौरव-जमीनी सच्चाईयों की समझ रखने वाला एक समष्टिकेंद्रित युवा ही सुलझा सकता है,और सच तो यह है कि अरबों की जनसंख्या वाले इस देश में वह युवा कोई भी हो सकता है,यहां तक कि तुम स्वयम भी....!!
तो राहुल,इस देश की समस्याएं क्या हैं,यह बार-बार तुम्हे बतलाकर तुम्हारा और मेरा वक्त जाया नहीं करना चाहता...मगर हां,तुम्हे यह बताना चाहता हूं कि उससे बडी समस्या,दरअसल सबसे बडी समस्या ही वह राजनीति है जिससे तुम्हारी ही भाषा में कहूं तो तुम "बिलोंग" करते हो, जिसमें कि तुम रचे-पगे हो,जो कि तुम्हारे आस-पास है और जिसका कि इस देश में सर्वत्र राज है,जो चौकडी तुम्हारे एन बगल में हैं और सबसे बडी और दुखदायी तो यह कि जिस "धन-बल" से यहां कि राजनीति चलती है,चल रही है...और शायद तुम्हारे होने के बावजुद भी चलेगी और जिसे कि तुम खुद भी इसी तरह हांकोगे...जो कि सुगम है,जो कि सरल है,या जो कि मलाईदार है....??क्या तुम अपने आसपास उन्ही लोगों को रखनेवाले हो,जिन्होने इस देश का खून चूस-चूस कर इतना धन और ताकत इकठ्ठा कर ली है कि कोई उनका कुछ नहीं बिगाड सके यहां तक कि कानून भी नहीं....भले अपवादस्वरूप कुछ भी होता दिखायी दे जाये...जो अब भी यही कर रहे हैं..जो आगे भी यही करेंगे.....क्योंकि इसके अलावा वे कुछ भी नहीं जानते... क्योंकि इसके अलावा उन्होने कुछ सीखा ही नहीं...क्योंकि महज अपने बीवी-बच्चों और परिवार-भर का पेट भरने के लिए उन्हें कुछ और सीखने की आवश्यकता भी नहीं थी...क्योंकि हरामखोरी दरअसल ज्यादा आसान होती है और वह हरामखोरी तो और भी ज्यादा,जिसके लिए किसी को कोई जवाब तक ना देना पड्ता हो और यहां तक कि गलती से कोई सिरफ़िरा जवाब मांग बैठे तो उसे उपर से छ: इंच छोटा कर डालने की "सलाह" तक दी जाती हो...दरअसल सत्ता और उसके साधनों की बन्दरबांट में जुटे हुए इन बन्दरों को नचाने में काबिल,इन अति महत्वपूर्ण मगर देश की नज़र में मलेच्छ लोगों को नचाने में तुम्हारी काबिलियत मुझे सन्देह है राहूल.....!!
तुम्हारे बाबुजी ने,ओ राहुल,एक बार सार्वजनिक रूप से यह कहा था कि केन्द्र से चला एक रुपया आम आदमी तक पहुंचते-पहुंचते पन्द्रह पैसे बन जाता है....वैसे इस कथन में मुझे पन्द्रह पैसे वाले हिस्से पर भी एतराज है....मेरा सन्देह है कि दरअसल पांच पैसा ही सही जगह तक पहुंच पाता है और राहूल इस धत्तकरम के जिम्मेवार कौन लोग हैं...किस चौकडी का किया-धरा है यह सब....कहा ना,मैं बार-बार तुम्हे बता कर तुम्हारा और मेरा वक्त जाया नहीं करना चाहता....बस तुमसे इतना पूछ्ने में ही मेरा जोर है कि इस हकीकत का-इस सच्चाई का-इन तथ्यों के मद्देनज़र तुम्हारे मन में कोई उपयुक्त विचार भी है अथवा नहीं....कि बस यों ही खाली-पीली......!!राहुल सच्चाई तो यह है की आज की तारीख में अगर ऐसे लोगों के खिलाफ अगर कार्रवाई की जाए तो दल के दल खाली हो जायेंगे...कोई साफ़-सुथरा आदमी दिखाई ही नहीं देगा....ऐसे में बताओ ना राहुल कि इस राजनीति में और इस राजनीति का तुम करोगे तो करोगे आखिर क्या....??किस तरह इस गंद भरे कचड़े को साफ़ करोगे...किन लोगों को तरजीह दोगे....और किन्हें वनवास...या सब कुछ इसी तरह चलता रहना है...ज्यादा उम्मीद तो इसी बात की लगती है..जिन शेरोन के मुहं में खून लग चुका हो वो भला घास खायेंगे....और यदि ऐसा ही है तो तुम्हारे राजनीति में पदार्पण को लेकर इतना शोर-शराबा किस बात का....तुम्हारे पी.एम्.बनने-ना-बनने को लेकर इतना हंगमा क्यूँ....!!इस हंगामे को रोको यार....थोड़ा भी देश के मान का तुम्हें भान है...तो इसकी जड़ों से जुडो....इन्हें सींचो...तब तुम खुद को मुंह दिखाने के योग्य रह सकोगे....और देश का थोडा-बहुत भी अगर भला हो पाया,तो इस देश की आगामी संताने तुम्हें याद करेगी..इस देश के वतमान बुजुर्ग तुम्हें तहे-दिल से शत-शत आशीर्वाद देंगे...और हम भी तुम्हे सैल्यूट करेंगे....सच राहुल भाई....!!

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